वैज्ञानिकों को जैसे ही बाहरी अंतरिक्ष में सूर्य की शक्ति का एहसास हुआ, उन्होंने वहां से सीधे इसका दोहन करने के तरीकों पर प्रयोग करना शुरू कर दिया। नासा एक सप्ताह में एडवांस्ड कम्पोजिट सोलर सेल सिस्टम लॉन्च करने जा रहा है, जिसके माध्यम से वह अंतरिक्ष में एक विशेष पाल भेजेगा।
नासा का एक मिशन रॉकेट लैब इलेक्ट्रॉन रॉकेट की मदद से हमारे सौर मंडल में नेविगेट करने के एक नए तरीके का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है । यह रॉकेट सूर्य के प्रकाश की प्रणोदक शक्ति का उपयोग करने के लिए अंतरिक्ष में एक विशेष पाल भेजेगा।
इस एडवांस्ड कम्पोजिट सोलर सेल सिस्टम को मंगलवार, 23 अप्रैल (न्यूजीलैंड में बुधवार, 24 अप्रैल) को न्यूजीलैंड के माहिया प्रायद्वीप पर स्थित रॉकेट लैब के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 1 से लॉन्च किया जाएगा ।
उद्देश्य
नासा की एडवांस्ड कम्पोजिट सोलर सेल प्रणाली यह साबित करना चाहती है कि वह अंतरिक्ष में यात्रा कर सकती है। इसका उद्देश्य चंद्रमा, मंगल और उससे भी आगे के मिशनों तक पहुंच बढ़ाना और मिशन की लागत कम करना है ।
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मिशन की मुख्य विशेषताएं
- रॉकेट मिशन के क्यूबसैट को पृथ्वी से लगभग 600 मील ऊपर पहुंचाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ऊंचाई से दोगुना है।
- यह नासा की उन्नत कम्पोजिट सौर सेल प्रणाली के प्रदर्शन की जांच के लिए आवश्यक है।
- इस ऊंचाई पर पाल सूर्य के प्रकाश से न्यूनतम बल महसूस करेंयह मोटे तौर पर आपके हाथ पर पेपर क्लिप के वजन के समान होगा।
- अंतरिक्ष में इससे मदद मिलेगी अंतरिक्ष यान वायु प्रतिरोध पर काबू पा लेता है और ऊंचाई हासिल कर लेता है।
- लगभग 2 महीने तक यह सबसिस्टम की जांच करता रहेगा। क्यूबसैट (लगभग माइक्रोवेव ओवन के आकार का) अपने परावर्तक सौर पाल को खोलेगा।
- प्रदर्शन परीक्षण में लगभग 1 सप्ताह का समय लगेगा। इस दौरान यह इधर-उधर घूमेगा। इससे पता चलेगा कि पाल किस तरह से काम कर सकता है सूर्य के प्रकाश के दबाव का उपयोग करके अपनी कक्षा को ऊपर या नीचे कर सकता है।



